piyush kaviraj

feelings and musings…


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किताब पढ़ने का सुख


#किताब के पीले पन्ने पलटने का सुख;

बिस्तर पर लेटकर,

पढ़ते हुए नाक में आती खुशबू;

और पढ़ते पढ़ते सो जाना,

चश्मा लगाकर ही।

पिताजी किसी समय रात को

दोनों टेबल पर रख देते।

कहाँ वो सुख पीडीएफ़ में,

कहाँ वो मज़ा #किन्डल में!

worldBook Day


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दिग्भ्रम का जाल निकाल कर, सही और सच को तोलिये


राजनीतिक पार्टियों की हवा यूँ चली, मानवता सड़ते देख रहा हूँ।

अपने ही दोस्तों, हमवतनों को आपस में लड़ते देख रहा हूँ।

पार्टियों को सत्ता से मतलब है, यही उनकी शक्ति है,

ये आपको क्या हुआ है, ये किस तरह की भक्ति है।

 

उनके घर चलते रहेंगे, उनके चापलूस इलेक्शन लड़ते रहेंगे,

आप मनमुटाव में जीकर, बस उनका घर भरते रहेंगे।

ये किस तरह का बचपना है, ये हरकतें कितनी बचकानी है,

आज नेता आपका सबकुछ है, ये किस तरह की नादानी है।

 

जो सक्षम है, अमरिका, कनाडा, सिडनी में बस जाएंगे,

आप तालियां ही बजाएंगे? क्या मरते मारते रह जाएंगे?

जिन आंखों को मूंद लिया है, उन आँखों को खोलिये,

दिग्भ्रम का जाल निकाल कर, सही और सच को तोलिये।

— पीयूष कविराज


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King in the North: Also the King on the Earth!


Its official!

And I am not talking about the Korean dictator.

The White Wolf aka the King in the North was voted to emerge as the winner in the GoT poll, winning 35% of 1,666,642 votes. Hail Democracy!!

Now, off to welcome the Winter: “The Long Night is coming, and the dead come with it”.

got 2

 

Details can be found at: Game of Thrones voting

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