piyush kaviraj

feelings and musings…


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उत्तर प्रदेश के जानवर


टीवी पर ‘आप की अदालत’ के कटघरे में अखिलेश यादव हैं. बात अमूल कंपनी के UP में आगमन की हो रही थी. अखिलेशजी ने कहा की अमूल वहाँ आ रही है क्योंकि शायद वहाँ जानवर ज्यादा हैं.

शायद सच ही है. जंगलराज तो वहीँ चल रहा है. दरिंदगी की खबरें तो वहीँ से आ रही हैं. अमानवीय घटनाएं तो वहीँ हो रही हैं. लेकिन उनका कहना है की मीडिया में और प्रदश के बाहर नकारात्मक खबरों का प्रचार किया जा रहा है. हो सकता है आप सही हों. लेकिन आप इतने पॉजिटिव काम करके क्यों नहीं दिखाते की ये दुष्प्रचार बंद हो. लैपटॉप तो दिया आपने, किन्तु लैपटॉप चार्ज करने के लिए बिजली भी मुहैया करवाइए.. दंगो पर भी काबू पाइए वरना जब हर पल मौत का साया रहेगा तो इंसान जान बचाने की कोशिश करेगा, लैपटॉप चलाने की नहीं. यहाँ बिजली भी है, लैपटॉप भी है, facebook भी है. लेकिन facebook पैर भी सिर्फ बलात्कार और बदाऊं ही दिख रहा है!!!

वरना हम ये सोचने पर विवश हो जायेंगे कि आखिर UP में ये जानवर आए कहाँ से!!!

-piyushKAVIRAJ

 


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उफ़! ये पागल सोच!


तो आखिरकार बारिश आई खारघर में! शाम से रुक रुक कर होती बारिश रात भर बरसती रही. आधी नींद में याद आया की बाहर कपडे हैं सूखने के लिए. उन्हें किसी तरह अन्दर किया. अन्दर करते करते ख़याल आया की मेरे तो बस कपडे बाहर रह गए थे.

मुल्क में और मुंबई में ही लाखों ऐसे हैं, जो परिवार समेत बाहर रह जाते हैं. भींगते रह जाते हैं. आस लगाए रह जाते हैं. कभी फ्लाईओवर की छाँव में खड़े होते हैं, कभी बड़े दुकाने के दीवारों के आसरे में छिपते हैं. जो बारिश हमे गर्मी से निजात दिलाती है, जिस बारिश में मेरे कई साथी मोर की तरह आनद उठाते हैं, वही बारिश कुछ लोगो के लिए नारकीय स्थिति उत्पन्न करती है.

rains 2

बॉलीवुड के हर गाने याद आते है. किन्तु उनके लिए तो ये ही पंक्ति- “रहने को घर नहीं, सोने को बिस्तर नहीं!!” उपयुक्त प्रतीत होते हैं. ये कैसी विडंबना है साथियों. हमने तो सोचना भी बंद कर दिया है. समय किसके पास है!! क्रेडिट कार्ड के खर्चे, कार का पेट्रोल, ए.सी. का बिल, ब्रोक्कोली की कीमत, रेस्टोरेंट में भोजन, बॉस के डेडलाइन… बहुत काम है. ये किस पागल सोच ने मुझे बहका दिया? मेरे घर में तो बूँद नहीं टपक रहे!! फिर मै सारी दुनिया का टेंशन क्यों ले रहा हूँ?

शायद ये सर-दर्द के वजह से हो रहा है. दवा के दूकान से क्रोसिन या डिस्प्रिन लेकर सो जाना चाहिए!

उफ़! ये पागल सोच!

Picture Source: (http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-tamilnadu/homeless-people-are-miserable-lot/article2666747.ece ; http://changeisinu.blogspot.in/ )


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सड़क अपघात


एक कार उद्दंड हो उठी …

ब्रह्म-मुहूर्त में केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडेजी का निधन हो गया. जन-नेता की कमी महाराष्ट्र में दिख रही है.

सवाल है बढ़ते अपघात और सड़क-हिंसा का. कभी नशे की हालत में तो कभी सिग्नल तोड़ने के चक्कर में; कभी आगे निकलने की होड़ में तो कभी जल्दी घर पहुचने की हड़बड़ी में नित बुरी घटनाएं होती रहती है. सड़क-नियम का पालन करने वाले भी कभी कभी इसकी चपेट में आ जाते है. सवाल तो कई उठेंगे. जवाब क्या है? हम तो उस विचारधारा से हैं जिसमे हेलमेट या सीट-बेल्ट का उपयोग ट्रैफिक-पुलिस की फाइन से बचने के लिए करते हैं, अपनी सुरक्षा के लिए नहीं. स्वस्थ्य मंत्री का कहना है की सड़क सुरक्षा हेतु पब्लिक में जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत हैं. ये पब्लिक है महोदय, सब जानती है; जानबूझ कर ऐसा करती है. ऐसे में कोई करे तो क्या करे!!

आज की फटाफट ज़िन्दगी में संयम कहाँ से लायें? मोबाइल फ़ोन पर बात करने का समय कहा से लायें? सब स्टीयरिंग पर ही होना है. ज़िन्दगी ने भी तो स्टीयरिंग दे रखा है!! इसको कब संभालेंगे हम!

एक बार खुद से सवाल करते हैं- क्या सचमुच कार उद्दंड हुई थी !!!

 

— piyush.KAVIRAJ…