एक कार उद्दंड हो उठी …
ब्रह्म-मुहूर्त में केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडेजी का निधन हो गया. जन-नेता की कमी महाराष्ट्र में दिख रही है.
सवाल है बढ़ते अपघात और सड़क-हिंसा का. कभी नशे की हालत में तो कभी सिग्नल तोड़ने के चक्कर में; कभी आगे निकलने की होड़ में तो कभी जल्दी घर पहुचने की हड़बड़ी में नित बुरी घटनाएं होती रहती है. सड़क-नियम का पालन करने वाले भी कभी कभी इसकी चपेट में आ जाते है. सवाल तो कई उठेंगे. जवाब क्या है? हम तो उस विचारधारा से हैं जिसमे हेलमेट या सीट-बेल्ट का उपयोग ट्रैफिक-पुलिस की फाइन से बचने के लिए करते हैं, अपनी सुरक्षा के लिए नहीं. स्वस्थ्य मंत्री का कहना है की सड़क सुरक्षा हेतु पब्लिक में जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत हैं. ये पब्लिक है महोदय, सब जानती है; जानबूझ कर ऐसा करती है. ऐसे में कोई करे तो क्या करे!!
आज की फटाफट ज़िन्दगी में संयम कहाँ से लायें? मोबाइल फ़ोन पर बात करने का समय कहा से लायें? सब स्टीयरिंग पर ही होना है. ज़िन्दगी ने भी तो स्टीयरिंग दे रखा है!! इसको कब संभालेंगे हम!
एक बार खुद से सवाल करते हैं- क्या सचमुच कार उद्दंड हुई थी !!!
— piyush.KAVIRAJ…
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